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ramayan 5.38.44: अथवा शत्रुओं को पीड़ा देने वाले महाबली लक्ष्मण अपने बड़े भाई से आज्ञा लेकर मुझे क्यों नहीं बचाते?॥ 44॥   |   ramayan सर्ग 5.38: सीताजी का हनुमान जी को पहचान के रूप में चित्रकट पर्वत पर घटित हए एक कौए के प्रसंग को सुनाना, श्रीराम को शीघ्र बुलाने के लिये अनुरोध करना और चूड़ामणि देना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 38: सीताजी का हनुमान जी को पहचान के रूप में चित्रकट पर्वत पर घटित हए एक कौए के प्रसंग को सुनाना, श्रीराम को शीघ्र बुलाने के लिये अनुरोध करना और चूड़ामणि देना  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  5.38.44 
भ्रातुरादेशमादाय लक्ष्मणो वा परंतप:।
कस्य हेतोर्न मां वीर: परित्राति महाबल:॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
अथवा शत्रुओं को पीड़ा देने वाले महाबली लक्ष्मण अपने बड़े भाई से आज्ञा लेकर मुझे क्यों नहीं बचाते?॥ 44॥
 
‘Or why doesn't the mighty warrior Lakshman, who torments the enemies, take permission from his elder brother and rescue me?॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)