श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 38: सीताजी का हनुमान जी को पहचान के रूप में चित्रकट पर्वत पर घटित हए एक कौए के प्रसंग को सुनाना, श्रीराम को शीघ्र बुलाने के लिये अनुरोध करना और चूड़ामणि देना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  5.38.36 
स रामाय नमस्कृत्वा राज्ञे दशरथाय च।
विसृष्टस्तेन वीरेण प्रतिपेदे स्वमालयम्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् दशरथपुत्र राजा राम को प्रणाम करके तथा उस वीर योद्धा से विदा लेकर वे अपने निवासस्थान पर चले गये।
 
Thereafter having saluted King Rama, son of Dasharatha, and having taken leave of that brave warrior, he went to his residence.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)