श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 38: सीताजी का हनुमान जी को पहचान के रूप में चित्रकट पर्वत पर घटित हए एक कौए के प्रसंग को सुनाना, श्रीराम को शीघ्र बुलाने के लिये अनुरोध करना और चूड़ामणि देना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  5.38.31 
अनुसृष्टस्तदा काको जगाम विविधां गतिम्।
त्राणकाम इमं लोकं सर्वं वै विचचार ह॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
कौआ अपने प्राण बचाने के लिए नाना प्रकार से उड़ता रहा और संसार भर में दौड़ता रहा, परंतु बाण ने उसका पीछा कहीं भी नहीं छोड़ा ॥31॥
 
The crow flew in various ways to save its life and kept running all over the world, but the arrow did not stop chasing it anywhere.॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)