श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 38: सीताजी का हनुमान जी को पहचान के रूप में चित्रकट पर्वत पर घटित हए एक कौए के प्रसंग को सुनाना, श्रीराम को शीघ्र बुलाने के लिये अनुरोध करना और चूड़ामणि देना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  5.38.27 
पुत्र: किल स शक्रस्य वायस: पततां वर:।
धरान्तरं गत: शीघ्रं पवनस्य गतौ सम:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
वह कौआ पक्षियों में श्रेष्ठ, इन्द्र का पुत्र था। उसकी गति वायु के समान तीव्र थी। वह शीघ्र ही स्वर्ग से उड़कर पृथ्वी पर आ पहुँचा॥ 27॥
 
‘That crow, the best of the birds, was the son of Indra. His speed was as fast as the wind. He quickly flew from heaven and reached the earth.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)