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ramayan 5.38.25: हे हाथी की सूँड़ के समान जांघों वाली सुन्दरी! किसने तुम्हारा वक्षस्थल क्षत-विक्षत किया है? क्रोध में भरे हुए पाँच मुँह वाले सर्प के साथ कौन क्रीड़ा कर रहा है?॥25॥   |   ramayan सर्ग 5.38: सीताजी का हनुमान जी को पहचान के रूप में चित्रकट पर्वत पर घटित हए एक कौए के प्रसंग को सुनाना, श्रीराम को शीघ्र बुलाने के लिये अनुरोध करना और चूड़ामणि देना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 38: सीताजी का हनुमान जी को पहचान के रूप में चित्रकट पर्वत पर घटित हए एक कौए के प्रसंग को सुनाना, श्रीराम को शीघ्र बुलाने के लिये अनुरोध करना और चूड़ामणि देना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  5.38.25 
केन ते नागनासोरु विक्षतं वै स्तनान्तरम्।
क: क्रीडति सरोषेण पञ्चवक्त्रेण भोगिना॥ २५॥
 
 
अनुवाद
हे हाथी की सूँड़ के समान जांघों वाली सुन्दरी! किसने तुम्हारा वक्षस्थल क्षत-विक्षत किया है? क्रोध में भरे हुए पाँच मुँह वाले सर्प के साथ कौन क्रीड़ा कर रहा है?॥25॥
 
O beautiful lady with thighs like elephant's trunk! Who has mutilated your chest? Who is playing with the five-headed serpent filled with rage?'॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)