श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 38: सीताजी का हनुमान जी को पहचान के रूप में चित्रकट पर्वत पर घटित हए एक कौए के प्रसंग को सुनाना, श्रीराम को शीघ्र बुलाने के लिये अनुरोध करना और चूड़ामणि देना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  5.38.24 
स मां दृष्ट्वा महाबाहुर्वितुन्नां स्तनयोस्तदा।
आशीविष इव क्रुद्ध: श्वसन् वाक्यमभाषत॥ २४॥
 
 
अनुवाद
मेरी छाती पर घाव देखकर महाबाहु श्री रामजी क्रोधित हो गए और विषैले सर्प के समान फुफकारते हुए भारी श्वास लेते हुए बोले -॥24॥
 
Seeing the wound on my chest, the mighty-armed Sri Rama became enraged and, hissing like a poisonous serpent, breathing heavily, said -॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)