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परिश्रमाच्च सुप्ता हे राघवाङ्केऽस्म्यहं चिरम्।
पर्यायेण प्रसुप्तश्च ममाङ्के भरताग्रज:॥ २१॥
अनुवाद
हनुमान! उस दिन मैं इतना थक गया था कि बहुत देर तक श्री रघुनाथजी की गोद में सोता रहा। फिर उनकी बारी आई और बड़े भाई भरत मेरी गोद में सिर रखकर सो गए।
Hanuman! I was so tired that day that I slept in Shri Raghunath's lap for a long time. Then his turn came and Bharat's elder brother slept with his head on my lap.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥