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ramayan 5.38.17: मुझे उस पक्षी पर बड़ा क्रोध आया, इसलिए मैंने अपनी कमीज कसने के लिए कमर का नाड़ा खींचना आरम्भ किया। उसी समय मेरी पोशाक थोड़ी नीचे खिसक गई और तुमने मुझे उस अवस्था में देखा॥17॥   |   ramayan सर्ग 5.38: सीताजी का हनुमान जी को पहचान के रूप में चित्रकट पर्वत पर घटित हए एक कौए के प्रसंग को सुनाना, श्रीराम को शीघ्र बुलाने के लिये अनुरोध करना और चूड़ामणि देना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 38: सीताजी का हनुमान जी को पहचान के रूप में चित्रकट पर्वत पर घटित हए एक कौए के प्रसंग को सुनाना, श्रीराम को शीघ्र बुलाने के लिये अनुरोध करना और चूड़ामणि देना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.38.17 
उत्कर्षन्त्यां च रशनां क्रुद्धायां मयि पक्षिणे।
स्रंसमाने च वसने ततो दृष्टा त्वया ह्यहम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
मुझे उस पक्षी पर बड़ा क्रोध आया, इसलिए मैंने अपनी कमीज कसने के लिए कमर का नाड़ा खींचना आरम्भ किया। उसी समय मेरी पोशाक थोड़ी नीचे खिसक गई और तुमने मुझे उस अवस्था में देखा॥17॥
 
I was very angry with that bird. So I started pulling the waist-string (Naara) to tighten my skirt. At that time my dress slipped down a little and you saw me in that state.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)