श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 38: सीताजी का हनुमान जी को पहचान के रूप में चित्रकट पर्वत पर घटित हए एक कौए के प्रसंग को सुनाना, श्रीराम को शीघ्र बुलाने के लिये अनुरोध करना और चूड़ामणि देना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.38.10 
यदि नोत्सहसे यातुं मया सार्धमनिन्दिते।
अभिज्ञानं प्रयच्छ त्वं जानीयाद् राघवो हि यत्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
"परन्तु हे सती-साध्वी देवी! यदि आप मेरे साथ चलने में उत्साहित नहीं हैं, तो कृपया मुझे अपना कोई परिचय दीजिए, जिससे श्री रामचन्द्रजी को पता चल जाए कि मैं आपसे मिला हूँ।"॥10॥
 
"But O Sati-Sadhvi Devi! If you are not enthusiastic about coming with me, then please give me some identification of yours, so that Shri Ramchandraji may know that I have met you."॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)