श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 37: सीता का हनुमान जी से श्रीराम को शीघ्र बुलाने का आग्रह, हनुमान जी का सीता से अपने साथ चलने का अनुरोध तथा सीता का अस्वीकार करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.37.7 
स वाच्य: संत्वरस्वेति यावदेव न पूर्यते।
अयं संवत्सर: कालस्तावद्धि मम जीवितम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
"तुम जाओ और उनसे कहो कि जल्दी करो। इस साल के खत्म होने तक मेरी ज़िंदगी बाकी है।"
 
"You go and tell them to hurry up. I have life left until this year is over."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)