श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 37: सीता का हनुमान जी से श्रीराम को शीघ्र बुलाने का आग्रह, हनुमान जी का सीता से अपने साथ चलने का अनुरोध तथा सीता का अस्वीकार करना  »  श्लोक 53-54
 
 
श्लोक  5.37.53-54 
अथ रक्षांसि भीमानि महान्ति बलवन्ति च।
कथंचित् साम्पराये त्वां जयेयु: कपिसत्तम॥ ५३॥
अथवा युध्यमानस्य पतेयं विमुखस्य ते।
पतितां च गृहीत्वा मां नयेयु: पापराक्षसा:॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
हे वानरश्रेष्ठ! यदि वे महाबली और भयंकर राक्षस किसी प्रकार युद्ध में तुम्हें पराजित कर दें, अथवा यदि मैं युद्ध करते समय तुम्हारे द्वारा मेरी रक्षा का ध्यान न रखने के कारण गिर पड़ूँ, तो वे पापी राक्षस मुझ असहाय पतित स्त्री को पुनः पकड़ लेंगे॥ 53-54॥
 
O best of the monkeys! If those very powerful and fearsome demons somehow defeat you in the battle, or if I fall down while fighting because you do not pay attention towards my safety, then those sinful demons will again catch hold of me, the helpless fallen woman.॥ 53-54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)