श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 37: सीता का हनुमान जी से श्रीराम को शीघ्र बुलाने का आग्रह, हनुमान जी का सीता से अपने साथ चलने का अनुरोध तथा सीता का अस्वीकार करना  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  5.37.52 
युध्यमानस्य रक्षोभिस्ततस्तै: क्रूरकर्मभि:।
प्रपतेयं हि ते पृष्ठाद् भयार्ता कपिसत्तम॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
हे वानरश्रेष्ठ! जब तुम उन क्रूर राक्षसों से युद्ध करोगे, तब मैं भय के मारे तुम्हारी पीठ से अवश्य ही गिर पड़ूँगा।
 
O best of the monkeys! When you will fight with those cruel demons, I will surely fall from your back out of fear.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)