श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 37: सीता का हनुमान जी से श्रीराम को शीघ्र बुलाने का आग्रह, हनुमान जी का सीता से अपने साथ चलने का अनुरोध तथा सीता का अस्वीकार करना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  5.37.46 
अहमाकाशमासक्ता उपर्युपरि सागरम्।
प्रपतेयं हि ते पृष्ठाद् भूयो वेगेन गच्छत:॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
‘मैं समुद्र के ऊपर आकाश में पहुँचकर बड़े वेग से चलकर आपकी पीठ से नीचे गिर सकता हूँ ॥46॥
 
‘Having reached the sky above the ocean, I can move with great speed and fall down from your back.॥ 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)