श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 37: सीता का हनुमान जी से श्रीराम को शीघ्र बुलाने का आग्रह, हनुमान जी का सीता से अपने साथ चलने का अनुरोध तथा सीता का अस्वीकार करना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  5.37.42 
तव सत्त्वं बलं चैव विजानामि महाकपे।
वायोरिव गतिश्चापि तेजश्चाग्नेरिवाद्भुतम्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
महाकापे ! मैं आपके बल और पराक्रम को जानता हूँ । आपका वेग वायु के समान और तेज अग्नि के समान है ॥42॥
 
‘Mahakape! I know your power and might. Your speed is like the wind and your brilliance is like that of fire. ॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)