श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 37: सीता का हनुमान जी से श्रीराम को शीघ्र बुलाने का आग्रह, हनुमान जी का सीता से अपने साथ चलने का अनुरोध तथा सीता का अस्वीकार करना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  5.37.41 
तं दृष्ट्वाचलसंकाशमुवाच जनकात्मजा।
पद्मपत्रविशालाक्षी मारुतस्यौरसं सुतम्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
पर्वत के समान विशाल शरीर वाले वायुपुत्र हनुमान्‌जी को देखकर खिले हुए कमलदलों के समान विशाल नेत्रों वाली जनकपुत्री ने उनसे कहा -॥41॥
 
Seeing Hanuman, the son of Vayu, having a body as huge as a mountain, the daughter of Janaka having large eyes like the blooming lotus petals said to him -॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)