श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 37: सीता का हनुमान जी से श्रीराम को शीघ्र बुलाने का आग्रह, हनुमान जी का सीता से अपने साथ चलने का अनुरोध तथा सीता का अस्वीकार करना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  5.37.35 
इति संचिन्त्य हनुमांस्तदा प्लवगसत्तम:।
दर्शयामास सीताया: स्वरूपमरिमर्दन:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
ऐसा विचारकर शत्रुसंहारक वानर हनुमान् ने उस समय सीता को अपना रूप दिखाया॥35॥
 
Thinking like this, Hanuman, the enemy-killing monkey, showed his form to Sita at that time. 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)