श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 37: सीता का हनुमान जी से श्रीराम को शीघ्र बुलाने का आग्रह, हनुमान जी का सीता से अपने साथ चलने का अनुरोध तथा सीता का अस्वीकार करना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  5.37.31 
हनूमन् दूरमध्वानं कथं मां नेतुमिच्छसि।
तदेव खलु ते मन्ये कपित्वं हरियूथप॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
हे वानरों के सरदार हनुमान! आप मुझे इतनी लम्बी यात्रा पर कैसे ले जाना चाहते हैं? मैं आपके इस साहस को वानरों की चपलता मानता हूँ॥31॥
 
Hanuman, the leader of the monkeys! How do you intend to take me on such a long journey? I consider this daring act of yours to be the agility of the monkeys.॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)