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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 5: सुन्दर काण्ड
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सर्ग 37: सीता का हनुमान जी से श्रीराम को शीघ्र बुलाने का आग्रह, हनुमान जी का सीता से अपने साथ चलने का अनुरोध तथा सीता का अस्वीकार करना
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श्लोक 28
श्लोक
5.37.28
नहि मे सम्प्रयातस्य त्वामितो नयतोऽङ्गने।
अनुगन्तुं गतिं शक्ता: सर्वे लङ्कानिवासिन:॥ २८॥
अनुवाद
कल्याणी! जब मैं तुम्हें यहाँ से ले जाऊँगा, तब समस्त लंकावासी मिलकर भी मेरा पीछा नहीं कर सकेंगे॥ 28॥
‘Kalyani! When I take you with me from here, even all the residents of Lanka together will not be able to chase me.॥ 28॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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