श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 36: हनुमान जी का सीता को मुद्रिका देना, सीता का ‘श्रीराम कब मेरा उद्धार करेंगे’ यह उत्सुक होकर पूछना तथा हनुमान् का श्रीराम के सीताविषयक प्रेम का वर्णन करके उन्हें सान्त्वना देना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.36.7 
विक्रान्तस्त्वं समर्थस्त्वं प्राज्ञस्त्वं वानरोत्तम।
येनेदं राक्षसपदं त्वयैकेन प्रधर्षितम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
हे वानरों में श्रेष्ठ! तुम बड़े वीर, बलवान और बुद्धिमान हो; क्योंकि तुमने ही इस राक्षस नगर को रौंद डाला है।
 
Best of the monkeys! You are very valiant, powerful and intelligent; because you alone have trampled this demon city.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)