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ramayan 5.36.45: जब भी वे कोई फल, फूल या कोई अन्य वस्तु देखते हैं जो किसी स्त्री के हृदय को आकर्षित करती है, तब वे गहरी साँस लेते हैं और बार-बार "हे मेरे प्रेम! हे मेरे प्रेम!" कहकर आपको पुकारते हैं॥ 45॥   |   ramayan सर्ग 5.36: हनुमान जी का सीता को मुद्रिका देना, सीता का ‘श्रीराम कब मेरा उद्धार करेंगे’ यह उत्सुक होकर पूछना तथा हनुमान् का श्रीराम के सीताविषयक प्रेम का वर्णन करके उन्हें सान्त्वना देना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 36: हनुमान जी का सीता को मुद्रिका देना, सीता का ‘श्रीराम कब मेरा उद्धार करेंगे’ यह उत्सुक होकर पूछना तथा हनुमान् का श्रीराम के सीताविषयक प्रेम का वर्णन करके उन्हें सान्त्वना देना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  5.36.45 
दृष्ट्वा फलं वा पुष्पं वा यच्चान्यत् स्त्रीमनोहरम्।
बहुशो हा प्रियेत्येवं श्वसंस्त्वामभिभाषते॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
जब भी वे कोई फल, फूल या कोई अन्य वस्तु देखते हैं जो किसी स्त्री के हृदय को आकर्षित करती है, तब वे गहरी साँस लेते हैं और बार-बार "हे मेरे प्रेम! हे मेरे प्रेम!" कहकर आपको पुकारते हैं॥ 45॥
 
Whenever they see any fruit, flower or any other object that attracts a woman's heart, they take a deep breath and call out to you saying repeatedly, "Oh my love! Oh my love!"॥ 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)