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ramayan 5.36.32: सीताजी के वचन सुनकर महापराक्रमी पवनपुत्र हनुमान्‌जी ने अपने मस्तक पर अंजलि बाँधी और इस प्रकार उत्तर देने लगे -॥32॥   |   ramayan सर्ग 5.36: हनुमान जी का सीता को मुद्रिका देना, सीता का ‘श्रीराम कब मेरा उद्धार करेंगे’ यह उत्सुक होकर पूछना तथा हनुमान् का श्रीराम के सीताविषयक प्रेम का वर्णन करके उन्हें सान्त्वना देना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 36: हनुमान जी का सीता को मुद्रिका देना, सीता का ‘श्रीराम कब मेरा उद्धार करेंगे’ यह उत्सुक होकर पूछना तथा हनुमान् का श्रीराम के सीताविषयक प्रेम का वर्णन करके उन्हें सान्त्वना देना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  5.36.32 
सीताया वचनं श्रुत्वा मारुतिर्भीमविक्रम:।
शिरस्यञ्जलिमाधाय वाक्यमुत्तरमब्रवीत्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
सीताजी के वचन सुनकर महापराक्रमी पवनपुत्र हनुमान्‌जी ने अपने मस्तक पर अंजलि बाँधी और इस प्रकार उत्तर देने लगे -॥32॥
 
Hearing the words of Sitaji, the fiercely valiant wind prince Hanuman tied anjali on his head and started replying to her in this manner -॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)