vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 5: सुन्दर काण्ड
»
सर्ग 36: हनुमान जी का सीता को मुद्रिका देना, सीता का ‘श्रीराम कब मेरा उद्धार करेंगे’ यह उत्सुक होकर पूछना तथा हनुमान् का श्रीराम के सीताविषयक प्रेम का वर्णन करके उन्हें सान्त्वना देना
»
श्लोक 26
श्लोक
5.36.26
कच्चिच्च लक्ष्मण: शूर: सुमित्रानन्दवर्धन:।
अस्त्रविच्छरजालेन राक्षसान् विधमिष्यति॥ २६॥
अनुवाद
क्या सुमित्रा के आनन्द को बढ़ाने वाले और अनेक अस्त्र-शस्त्रों के ज्ञाता वीर लक्ष्मण अपने बाणों की वर्षा से राक्षसों का संहार करेंगे? 26॥
Will the brave Lakshmana, who increases the joy of Sumitra, and is knowledgeable of many weapons, kill the demons with his shower of arrows? 26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×