श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 36: हनुमान जी का सीता को मुद्रिका देना, सीता का ‘श्रीराम कब मेरा उद्धार करेंगे’ यह उत्सुक होकर पूछना तथा हनुमान् का श्रीराम के सीताविषयक प्रेम का वर्णन करके उन्हें सान्त्वना देना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  5.36.25 
वानराधिपति: श्रीमान् सुग्रीव: कच्चिदेष्यति।
मत्कृते हरिभिर्वीरैर्वृतो दन्तनखायुधै:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
क्या महान वानरराज सुग्रीव मुझे बचाने के लिए अपने दाँतों और पंजों से आक्रमण करने वाले वीर वानरों के साथ यहाँ आने का कष्ट उठाएँगे?॥ 25॥
 
Will the noble monkey king Sugreeva take the trouble of coming here along with the brave monkeys who attack with their teeth and claws to rescue me?॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)