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ramayan 5.36.23: क्या माननीय श्री रघुनाथजी मेरे दुःख से बहुत दुःखी हैं? क्या वे मुझसे उदासीन हो गए हैं? क्या श्री राम मुझे इस संकट से उबारेंगे?   |   ramayan सर्ग 5.36: हनुमान जी का सीता को मुद्रिका देना, सीता का ‘श्रीराम कब मेरा उद्धार करेंगे’ यह उत्सुक होकर पूछना तथा हनुमान् का श्रीराम के सीताविषयक प्रेम का वर्णन करके उन्हें सान्त्वना देना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 36: हनुमान जी का सीता को मुद्रिका देना, सीता का ‘श्रीराम कब मेरा उद्धार करेंगे’ यह उत्सुक होकर पूछना तथा हनुमान् का श्रीराम के सीताविषयक प्रेम का वर्णन करके उन्हें सान्त्वना देना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  5.36.23 
मन्निमित्तेन मानार्ह: कच्चिच्छोकेन राघव:।
कच्चिन्नान्यमना राम: कच्चिन्मां तारयिष्यति॥ २३॥
 
 
अनुवाद
क्या माननीय श्री रघुनाथजी मेरे दुःख से बहुत दुःखी हैं? क्या वे मुझसे उदासीन हो गए हैं? क्या श्री राम मुझे इस संकट से उबारेंगे?
 
‘Is the honourable Shri Raghunathji very much distressed by the grief he is feeling for me? Has he become indifferent to me? Will Shri Ram rescue me from this crisis?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)