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ramayan 5.36.14: 'अथवा वे दोनों भाई देवताओं को भी दण्ड देने की शक्ति रखते हैं (फिर भी वे अब तक चुप हैं, यह उनका नहीं, मेरा ही दोष है) मुझे ऐसा लगता है कि मेरे दुःखों का अभी अंत नहीं हुआ है॥14॥   |   ramayan सर्ग 5.36: हनुमान जी का सीता को मुद्रिका देना, सीता का ‘श्रीराम कब मेरा उद्धार करेंगे’ यह उत्सुक होकर पूछना तथा हनुमान् का श्रीराम के सीताविषयक प्रेम का वर्णन करके उन्हें सान्त्वना देना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 36: हनुमान जी का सीता को मुद्रिका देना, सीता का ‘श्रीराम कब मेरा उद्धार करेंगे’ यह उत्सुक होकर पूछना तथा हनुमान् का श्रीराम के सीताविषयक प्रेम का वर्णन करके उन्हें सान्त्वना देना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  5.36.14 
अथवा शक्तिमन्तौ तौ सुराणामपि निग्रहे।
ममैव तु न दु:खानामस्ति मन्ये विपर्यय:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
'अथवा वे दोनों भाई देवताओं को भी दण्ड देने की शक्ति रखते हैं (फिर भी वे अब तक चुप हैं, यह उनका नहीं, मेरा ही दोष है) मुझे ऐसा लगता है कि मेरे दुःखों का अभी अंत नहीं हुआ है॥14॥
 
‘Or those two brothers have the power to punish even the gods (yet they are silent till now, it is not their fault but my fate). I feel that my sufferings have not yet come to an end.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)