|
| |
| |
श्लोक 5.35.90  |
हतेऽसुरे संयति शम्बसादने
कपिप्रवीरेण महर्षिचोदनात्।
ततोऽस्मि वायुप्रभवो हि मैथिलि
प्रभावतस्तत्प्रतिमश्च वानर:॥ ९०॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| ‘जब ऋषियों की प्रेरणा से वानरराज केसरी ने युद्ध में शम्बसदन नामक दैत्य को मार डाला, तब मैं वायुदेव से उत्पन्न हुआ। अतः हे मैथिली! मैं उस वायुदेव के समान ही शक्तिशाली वानर हूँ।’॥90॥ |
| |
| ‘With the inspiration of the sages, when the demon named Shambasadan was killed in the war by the monkey king Kesari, I was born from the wind god. Therefore, Maithili! I am a monkey as powerful as that wind god.'॥ 90॥ |
| |
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये सुन्दरकाण्डे पञ्चत्रिंश: सर्ग:॥ ३५॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके सुन्दरकाण्डमें पैंतीसवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ३५॥ |
| |
| ✨ ai-generated |
| |
|