श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 35: सीताजी के पूछने पर हनुमान जी का श्रीराम के शारीरिक चिह्नों और गुणों का वर्णन करना तथा नर-वानर की मित्रता का प्रसङ्ग सुनाकर सीताजी के मन में विश्वास उत्पन्न करना  »  श्लोक 88
 
 
श्लोक  5.35.88 
हनूमन्तं कपिं व्यक्तं मन्यते नान्यथेति सा।
अथोवाच हनूमांस्तामुत्तरं प्रियदर्शनाम्॥ ८८॥
 
 
अनुवाद
अब वे हनुमान को सचमुच का बंदर समझने लगे। वरन् वह मायावी रूप वाला राक्षस नहीं है। तत्पश्चात् हनुमान जी ने प्रियदर्शना सीता से पुनः कहा- ॥88॥
 
Now they started considering Hanuman as a real monkey. On the contrary, it is not a demon in illusory form. After that Hanuman ji again said to Priyadarshana Sita – ॥ 88॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)