vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 5: सुन्दर काण्ड
»
सर्ग 35: सीताजी के पूछने पर हनुमान जी का श्रीराम के शारीरिक चिह्नों और गुणों का वर्णन करना तथा नर-वानर की मित्रता का प्रसङ्ग सुनाकर सीताजी के मन में विश्वास उत्पन्न करना
»
श्लोक 87
श्लोक
5.35.87
चारु तद् वदनं तस्यास्ताम्रशुक्लायतेक्षणम्।
अशोभत विशालाक्ष्या राहुमुक्त इवोडुराट्॥ ८७॥
अनुवाद
उस समय लाल, श्वेत और विशाल नेत्रों वाली सीता का सुन्दर मुख राहु के ग्रहण से मुक्त हुए चन्द्रमा के समान शोभा पा रहा था।
At that time, the beautiful face of big-eyed Sita, with red, white and large eyes, looked like the moon freed from the eclipse of Rahu.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas