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ramayan 5.35.87: उस समय लाल, श्वेत और विशाल नेत्रों वाली सीता का सुन्दर मुख राहु के ग्रहण से मुक्त हुए चन्द्रमा के समान शोभा पा रहा था।   |   ramayan सर्ग 5.35: सीताजी के पूछने पर हनुमान जी का श्रीराम के शारीरिक चिह्नों और गुणों का वर्णन करना तथा नर-वानर की मित्रता का प्रसङ्ग सुनाकर सीताजी के मन में विश्वास उत्पन्न करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 35: सीताजी के पूछने पर हनुमान जी का श्रीराम के शारीरिक चिह्नों और गुणों का वर्णन करना तथा नर-वानर की मित्रता का प्रसङ्ग सुनाकर सीताजी के मन में विश्वास उत्पन्न करना  »  श्लोक 87
 
 
श्लोक  5.35.87 
चारु तद् वदनं तस्यास्ताम्रशुक्लायतेक्षणम्।
अशोभत विशालाक्ष्या राहुमुक्त इवोडुराट्॥ ८७॥
 
 
अनुवाद
उस समय लाल, श्वेत और विशाल नेत्रों वाली सीता का सुन्दर मुख राहु के ग्रहण से मुक्त हुए चन्द्रमा के समान शोभा पा रहा था।
 
At that time, the beautiful face of big-eyed Sita, with red, white and large eyes, looked like the moon freed from the eclipse of Rahu.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)