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ramayan 5.35.85: इस प्रकार, हनुमान ने उचित और ठोस कारण बताकर और उन्हें भगवान राम और लक्ष्मण के शारीरिक चिह्नों से पहचानकर, शोक से दुर्बल सीता को विश्वास दिलाया। तब उन्होंने हनुमान को भगवान राम का दूत मान लिया।   |   ramayan सर्ग 5.35: सीताजी के पूछने पर हनुमान जी का श्रीराम के शारीरिक चिह्नों और गुणों का वर्णन करना तथा नर-वानर की मित्रता का प्रसङ्ग सुनाकर सीताजी के मन में विश्वास उत्पन्न करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 35: सीताजी के पूछने पर हनुमान जी का श्रीराम के शारीरिक चिह्नों और गुणों का वर्णन करना तथा नर-वानर की मित्रता का प्रसङ्ग सुनाकर सीताजी के मन में विश्वास उत्पन्न करना  »  श्लोक 85
 
 
श्लोक  5.35.85 
एवं विश्वासिता सीता हेतुभि: शोककर्शिता।
उपपन्नैरभिज्ञानैर्दूतं तमधिगच्छति॥ ८५॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार, हनुमान ने उचित और ठोस कारण बताकर और उन्हें भगवान राम और लक्ष्मण के शारीरिक चिह्नों से पहचानकर, शोक से दुर्बल सीता को विश्वास दिलाया। तब उन्होंने हनुमान को भगवान राम का दूत मान लिया।
 
Thus, by giving reasonable and convincing reasons and by identifying them with the physical marks of Lord Rama and Lakshmana, Hanuman made Sita, who was weakened by grief, believe him. Then she considered Hanuman to be the messenger of Lord Rama.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)