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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 5: सुन्दर काण्ड
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सर्ग 35: सीताजी के पूछने पर हनुमान जी का श्रीराम के शारीरिक चिह्नों और गुणों का वर्णन करना तथा नर-वानर की मित्रता का प्रसङ्ग सुनाकर सीताजी के मन में विश्वास उत्पन्न करना
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श्लोक 80-81h
श्लोक
5.35.80-81h
राघवश्च महावीर्य: क्षिप्रं त्वामभिपत्स्यते॥ ८०॥
सपुत्रबान्धवं हत्वा रावणं राक्षसाधिपम्।
अनुवाद
पराक्रमी श्री रामचन्द्रजी राक्षसराज रावण को उसके पुत्र और सम्बन्धियों सहित मारकर शीघ्र ही तुमसे मिलेंगे॥80 1/2॥
The mighty Shri Ramchandraji will meet you soon after killing the demon king Ravana along with his son and relatives. 80 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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