श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 35: सीताजी के पूछने पर हनुमान जी का श्रीराम के शारीरिक चिह्नों और गुणों का वर्णन करना तथा नर-वानर की मित्रता का प्रसङ्ग सुनाकर सीताजी के मन में विश्वास उत्पन्न करना  »  श्लोक 78-79h
 
 
श्लोक  5.35.78-79h 
दिष्टॺाहं हरिसैन्यानां त्वन्नाशमनुशोचताम्॥ ७८॥
अपनेष्यामि संतापं तवाधिगमशासनात्।
 
 
अनुवाद
तुम्हारे विनाश की संभावना से निरन्तर शोक मना रहे वानर सैनिकों को यह समाचार देकर कि तुम मिल गए हो, मैं उनका दुःख दूर कर दूँगा। यह मेरे लिए परम हर्ष का विषय होगा।
 
By informing the monkey soldiers who are constantly mourning the possibility of your destruction that you have been found, I will relieve their sorrow. This will be a matter of great joy for me. 78 1/2.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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