श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 35: सीताजी के पूछने पर हनुमान जी का श्रीराम के शारीरिक चिह्नों और गुणों का वर्णन करना तथा नर-वानर की मित्रता का प्रसङ्ग सुनाकर सीताजी के मन में विश्वास उत्पन्न करना  »  श्लोक 73-74h
 
 
श्लोक  5.35.73-74h 
एतत् ते सर्वमाख्यातं यथावृत्तमनिन्दिते॥ ७३॥
अभिभाषस्व मां देवि दूतो दाशरथेरहम्।
 
 
अनुवाद
सतीशिरोमाने! मैंने यह सम्पूर्ण कथा विस्तारपूर्वक आपके समक्ष प्रस्तुत कर दी है। देवि! मैं दशरथनन्दन श्री राम का दूत हूँ, अतः आप मुझसे बात करें। 73 1/2।
 
Satishiromane! I have presented this entire story in full detail to you. Devi! I am the messenger of Dasharathanandan Shri Ram, so please talk to me. 73 1/2.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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