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ramayan 5.35.71-72h: आपके दर्शन के लिए उत्सुक होते हुए भी, अपने सामने विशाल समुद्र को देखकर समस्त वानर पुनः अत्यंत चिंतित हो गए। समुद्र को देखकर वानर सेना संकट में है, यह जानकर मैंने उनका तीव्र भय दूर किया और सौ योजन की दूरी तक समुद्र पार करके यहाँ पहुँच गया।   |   ramayan सर्ग 5.35: सीताजी के पूछने पर हनुमान जी का श्रीराम के शारीरिक चिह्नों और गुणों का वर्णन करना तथा नर-वानर की मित्रता का प्रसङ्ग सुनाकर सीताजी के मन में विश्वास उत्पन्न करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 35: सीताजी के पूछने पर हनुमान जी का श्रीराम के शारीरिक चिह्नों और गुणों का वर्णन करना तथा नर-वानर की मित्रता का प्रसङ्ग सुनाकर सीताजी के मन में विश्वास उत्पन्न करना  »  श्लोक 71-72h
 
 
श्लोक  5.35.71-72h 
चिन्तां जग्मु: पुनर्भीमां त्वद्दर्शनसमुत्सुका:।
अथाहं हरिसैन्यस्य सागरं दृश्य सीदत:॥ ७१॥
व्यवधूय भयं तीव्रं योजनानां शतं प्लुत:।
 
 
अनुवाद
आपके दर्शन के लिए उत्सुक होते हुए भी, अपने सामने विशाल समुद्र को देखकर समस्त वानर पुनः अत्यंत चिंतित हो गए। समुद्र को देखकर वानर सेना संकट में है, यह जानकर मैंने उनका तीव्र भय दूर किया और सौ योजन की दूरी तक समुद्र पार करके यहाँ पहुँच गया।
 
Despite being eager to see you, all the monkeys again became very worried on seeing the vast ocean in front of them. Knowing that the monkey army is in trouble after seeing the ocean, I dispelled their intense fear and crossed the sea for a distance of hundred yojanas and reached here. 71 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)