श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 35: सीताजी के पूछने पर हनुमान जी का श्रीराम के शारीरिक चिह्नों और गुणों का वर्णन करना तथा नर-वानर की मित्रता का प्रसङ्ग सुनाकर सीताजी के मन में विश्वास उत्पन्न करना  »  श्लोक 66-67h
 
 
श्लोक  5.35.66-67h 
अङ्गदोऽकथयत् तस्य जनस्थाने महद्वधम्॥ ६६॥
रक्षसा भीमरूपेण त्वामुद्दिश्य यथार्थत:।
 
 
अनुवाद
तब अंगद ने आपको जनस्थान में आपकी रक्षा के लिए युद्ध करते समय उस भयानक रूप वाले राक्षस द्वारा किये गये जटायु के महान वध का सम्पूर्ण वृत्तान्त सुनाया।
 
Then Angad narrated to you the entire incident of the great killing of Jatayu by that terrifying looking demon while he was fighting for your protection in Janasthan. 66 1/2.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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