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ramayan 5.35.6: हे कमल पुष्प के समान सुन्दर नेत्रों वाली विदेहराजकुमारी! यह मेरे लिए बड़े सौभाग्य की बात है कि तुम अपने पति श्री राम और देवर लक्ष्मण के शरीरों के विषय में जानकर भी मुझसे पूछ रही हो॥6॥   |   ramayan सर्ग 5.35: सीताजी के पूछने पर हनुमान जी का श्रीराम के शारीरिक चिह्नों और गुणों का वर्णन करना तथा नर-वानर की मित्रता का प्रसङ्ग सुनाकर सीताजी के मन में विश्वास उत्पन्न करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 35: सीताजी के पूछने पर हनुमान जी का श्रीराम के शारीरिक चिह्नों और गुणों का वर्णन करना तथा नर-वानर की मित्रता का प्रसङ्ग सुनाकर सीताजी के मन में विश्वास उत्पन्न करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.35.6 
जानन्ती बत दिष्टॺा मां वैदेहि परिपृच्छसि।
भर्तु: कमलपत्राक्षि संस्थानं लक्ष्मणस्य च॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हे कमल पुष्प के समान सुन्दर नेत्रों वाली विदेहराजकुमारी! यह मेरे लिए बड़े सौभाग्य की बात है कि तुम अपने पति श्री राम और देवर लक्ष्मण के शरीरों के विषय में जानकर भी मुझसे पूछ रही हो॥6॥
 
O princess of Videha, who has eyes as beautiful as lotus flowers! It is a matter of great fortune for me that you are asking me even after knowing about the bodies of your husband Shri Ram and brother-in-law Lakshman.॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)