|
| |
| |
श्लोक 5.35.56  |
ततस्ते मार्गमाणा वै सुग्रीववचनातुरा:।
चरन्ति वसुधां कृत्स्नां वयमन्ये च वानरा:॥ ५६॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| सुग्रीव की आज्ञा से भयभीत होकर मैं और अन्य वानर आपको ढूँढ़ते हुए सम्पूर्ण जगत् में भटक रहे हैं॥ 56॥ |
| |
| ‘Frightened by Sugreeva's command I and the other monkeys are wandering all over the world looking for you.॥ 56॥ |
| ✨ ai-generated |
| |
|