श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 35: सीताजी के पूछने पर हनुमान जी का श्रीराम के शारीरिक चिह्नों और गुणों का वर्णन करना तथा नर-वानर की मित्रता का प्रसङ्ग सुनाकर सीताजी के मन में विश्वास उत्पन्न करना  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  5.35.56 
ततस्ते मार्गमाणा वै सुग्रीववचनातुरा:।
चरन्ति वसुधां कृत्स्नां वयमन्ये च वानरा:॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
सुग्रीव की आज्ञा से भयभीत होकर मैं और अन्य वानर आपको ढूँढ़ते हुए सम्पूर्ण जगत् में भटक रहे हैं॥ 56॥
 
‘Frightened by Sugreeva's command I and the other monkeys are wandering all over the world looking for you.॥ 56॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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