श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 35: सीताजी के पूछने पर हनुमान जी का श्रीराम के शारीरिक चिह्नों और गुणों का वर्णन करना तथा नर-वानर की मित्रता का प्रसङ्ग सुनाकर सीताजी के मन में विश्वास उत्पन्न करना  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  5.35.51 
ततस्ताभ्यां कुमाराभ्यां वीराभ्यां स हरीश्वर:।
किष्किन्धां समुपागम्य वाली युद्धे निपातित:॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद वे दोनों वीर राजकुमार किष्किन्धा गये और युद्ध में वानरराज बालि को मार डाला।
 
‘After this, those two brave princes went to Kishkinda and killed the monkey king Vali in battle.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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