श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 35: सीताजी के पूछने पर हनुमान जी का श्रीराम के शारीरिक चिह्नों और गुणों का वर्णन करना तथा नर-वानर की मित्रता का प्रसङ्ग सुनाकर सीताजी के मन में विश्वास उत्पन्न करना  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  5.35.49 
स त्वां मनुजशार्दूल: क्षिप्रं प्राप्स्यति राघव:।
समित्रबान्धवं हत्वा रावणं जनकात्मजे॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
‘जनकनन्दिनी! प्रभु श्री राम अपने बन्धुओं और सम्बन्धियों सहित रावण का वध करके शीघ्र ही तुमसे मिलेंगे।’ 49॥
 
‘Janakandini! Lord Shri Ram will meet you soon after killing Ravana along with his friends and relatives. 49॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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