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ramayan 5.35.48: राजकुमारी! आपके दर्शन न करने के कारण श्री राम सुन्दर वन, नदी और झरनों में विचरण करते हुए भी सुख नहीं पाते॥48॥   |   ramayan सर्ग 5.35: सीताजी के पूछने पर हनुमान जी का श्रीराम के शारीरिक चिह्नों और गुणों का वर्णन करना तथा नर-वानर की मित्रता का प्रसङ्ग सुनाकर सीताजी के मन में विश्वास उत्पन्न करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.35.48 
काननानि सुरम्याणि नदीप्रस्रवणानि च।
चरन् न रतिमाप्नोति त्वामपश्यन् नृपात्मजे॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
राजकुमारी! आपके दर्शन न करने के कारण श्री राम सुन्दर वन, नदी और झरनों में विचरण करते हुए भी सुख नहीं पाते॥48॥
 
Princess! Because of not seeing you, Shri Ram does not find happiness even while roaming around beautiful forests, rivers and waterfalls. ॥ 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)