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ramayan 5.35.33-34h: वहाँ दोनों महाप्रतापी वानरराजों और नरराजों ने अपने-अपने पूर्वजन्म की सारी घटनाएँ बताईं और दोनों ने एक-दूसरे को आश्वासन दिया।   |   ramayan सर्ग 5.35: सीताजी के पूछने पर हनुमान जी का श्रीराम के शारीरिक चिह्नों और गुणों का वर्णन करना तथा नर-वानर की मित्रता का प्रसङ्ग सुनाकर सीताजी के मन में विश्वास उत्पन्न करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 35: सीताजी के पूछने पर हनुमान जी का श्रीराम के शारीरिक चिह्नों और गुणों का वर्णन करना तथा नर-वानर की मित्रता का प्रसङ्ग सुनाकर सीताजी के मन में विश्वास उत्पन्न करना  »  श्लोक 33-34h
 
 
श्लोक  5.35.33-34h 
तत्र तौ कीर्तिसम्पन्नौ हरीश्वरनरेश्वरौ॥ ३३॥
परस्परकृताश्वासौ कथया पूर्ववृत्तया।
 
 
अनुवाद
वहाँ दोनों महाप्रतापी वानरराजों और नरराजों ने अपने-अपने पूर्वजन्म की सारी घटनाएँ बताईं और दोनों ने एक-दूसरे को आश्वासन दिया।
 
‘There both the illustrious monkey-lords and the men-lords narrated the past events that had happened to them and both of them assured the other.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)