श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 35: सीताजी के पूछने पर हनुमान जी का श्रीराम के शारीरिक चिह्नों और गुणों का वर्णन करना तथा नर-वानर की मित्रता का प्रसङ्ग सुनाकर सीताजी के मन में विश्वास उत्पन्न करना  »  श्लोक 32-33h
 
 
श्लोक  5.35.32-33h 
निवेदितौ च तत्त्वेन सुग्रीवाय महात्मने॥ ३२॥
तयोरन्योन्यसम्भाषाद् भृशं प्रीतिरजायत।
 
 
अनुवाद
वहाँ मैंने महात्मा सुग्रीव को इन दोनों भाइयों का सच्चा परिचय दिया। उसके बाद श्री राम और सुग्रीव ने आपस में बातचीत की, जिससे उनमें बड़ा प्रेम हो गया।
 
There I gave the true introduction of these two brothers to Mahatma Sugriva. After that Shri Ram and Sugriva talked to each other, due to which there was great love between them.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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