श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 35: सीताजी के पूछने पर हनुमान जी का श्रीराम के शारीरिक चिह्नों और गुणों का वर्णन करना तथा नर-वानर की मित्रता का प्रसङ्ग सुनाकर सीताजी के मन में विश्वास उत्पन्न करना  »  श्लोक 30-31h
 
 
श्लोक  5.35.30-31h 
तावहं पुरुषव्याघ्रौ सुग्रीववचनात् प्रभू॥ ३०॥
रूपलक्षणसम्पन्नौ कृताञ्जलिरुपस्थित:।
 
 
अनुवाद
सुग्रीव की आज्ञा से मैं उन दोनों प्रभावशाली रूप और शुभ लक्षणों वाले सिंहवीरों की सेवा में हाथ जोड़कर उपस्थित हुआ॥30 1/2॥
 
By the order of Sugriva, I appeared with folded hands in the service of those two male lion warriors with impressive looks and auspicious traits. 30 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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