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ramayan 5.35.29-30h: उस शिखर पर विराजमान होकर वानरराज सुग्रीव ने शीघ्र ही मुझे उन दोनों भाइयों के पास भेज दिया ॥29 1/2॥   |   ramayan सर्ग 5.35: सीताजी के पूछने पर हनुमान जी का श्रीराम के शारीरिक चिह्नों और गुणों का वर्णन करना तथा नर-वानर की मित्रता का प्रसङ्ग सुनाकर सीताजी के मन में विश्वास उत्पन्न करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 35: सीताजी के पूछने पर हनुमान जी का श्रीराम के शारीरिक चिह्नों और गुणों का वर्णन करना तथा नर-वानर की मित्रता का प्रसङ्ग सुनाकर सीताजी के मन में विश्वास उत्पन्न करना  »  श्लोक 29-30h
 
 
श्लोक  5.35.29-30h 
तत: स शिखरे तस्मिन् वानरेन्द्रो व्यवस्थित:॥ २९॥
तयो: समीपं मामेव प्रेषयामास सत्वरम्।
 
 
अनुवाद
उस शिखर पर विराजमान होकर वानरराज सुग्रीव ने शीघ्र ही मुझे उन दोनों भाइयों के पास भेज दिया ॥29 1/2॥
 
After sitting on that peak, the monkey king Sugriva quickly sent me to those two brothers. 29 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)