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ramayan 5.35.27-29h: जब वे दोनों भाई छाल के वस्त्र धारण करके हाथ में धनुष लिए हुए ऋष्यमूक पर्वत के सुन्दर प्रदेश में आए, तब उन दोनों धनुषधारी वीरों को वहाँ देखकर वानरराज सुग्रीव भयभीत हो गए और पर्वत की सबसे ऊँची चोटी पर चढ़ गए॥ 27-28 1/2॥   |   ramayan सर्ग 5.35: सीताजी के पूछने पर हनुमान जी का श्रीराम के शारीरिक चिह्नों और गुणों का वर्णन करना तथा नर-वानर की मित्रता का प्रसङ्ग सुनाकर सीताजी के मन में विश्वास उत्पन्न करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 35: सीताजी के पूछने पर हनुमान जी का श्रीराम के शारीरिक चिह्नों और गुणों का वर्णन करना तथा नर-वानर की मित्रता का प्रसङ्ग सुनाकर सीताजी के मन में विश्वास उत्पन्न करना  »  श्लोक 27-29h
 
 
श्लोक  5.35.27-29h 
ततस्तौ चीरवसनौ धनु:प्रवरपाणिनौ॥ २७॥
ऋष्यमूकस्य शैलस्य रम्यं देशमुपागतौ।
स तौ दृष्ट्वा नरव्याघ्रौ धन्विनौ वानरर्षभ:॥ २८॥
अभिप्लुतो गिरेस्तस्य शिखरं भयमोहित:।
 
 
अनुवाद
जब वे दोनों भाई छाल के वस्त्र धारण करके हाथ में धनुष लिए हुए ऋष्यमूक पर्वत के सुन्दर प्रदेश में आए, तब उन दोनों धनुषधारी वीरों को वहाँ देखकर वानरराज सुग्रीव भयभीत हो गए और पर्वत की सबसे ऊँची चोटी पर चढ़ गए॥ 27-28 1/2॥
 
‘When the two brothers, wearing bark clothes and holding bows in their hands, came to the beautiful region of Rishyamuka mountain, the chief of the monkeys, Sugreeva, was frightened to see those two brave men holding bows present there, and jumped up to the highest peak of the mountain.॥ 27-28 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)