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ramayan 5.35.26-27h: उन दिनों हम सब लोग सत्यवादी वानरराज सुग्रीव की सेवा करते थे, जिन्हें उनके बड़े भाई ने राज्य से हटा दिया था॥26 1/2॥   |   ramayan सर्ग 5.35: सीताजी के पूछने पर हनुमान जी का श्रीराम के शारीरिक चिह्नों और गुणों का वर्णन करना तथा नर-वानर की मित्रता का प्रसङ्ग सुनाकर सीताजी के मन में विश्वास उत्पन्न करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 35: सीताजी के पूछने पर हनुमान जी का श्रीराम के शारीरिक चिह्नों और गुणों का वर्णन करना तथा नर-वानर की मित्रता का प्रसङ्ग सुनाकर सीताजी के मन में विश्वास उत्पन्न करना  »  श्लोक 26-27h
 
 
श्लोक  5.35.26-27h 
वयं च हरिराजं तं सुग्रीवं सत्यसङ्गरम्॥ २६॥
परिचर्यामहे राज्यात् पूर्वजेनावरोपितम्।
 
 
अनुवाद
उन दिनों हम सब लोग सत्यवादी वानरराज सुग्रीव की सेवा करते थे, जिन्हें उनके बड़े भाई ने राज्य से हटा दिया था॥26 1/2॥
 
In those days, we all used to serve the truthful monkey king Sugreeva, who had been dethroned from the kingdom by his elder brother.॥ 26 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)