श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 35: सीताजी के पूछने पर हनुमान जी का श्रीराम के शारीरिक चिह्नों और गुणों का वर्णन करना तथा नर-वानर की मित्रता का प्रसङ्ग सुनाकर सीताजी के मन में विश्वास उत्पन्न करना  »  श्लोक 24-25h
 
 
श्लोक  5.35.24-25h 
त्वामेव मार्गमाणौ तौ विचरन्तौ वसुन्धराम्॥ २४॥
ददर्शतुर्मृगपतिं पूर्वजेनावरोपितम्।
 
 
अनुवाद
आपकी खोज में पृथ्वी पर विचरण करते समय उन दोनों भाइयों की भेंट वानरराज सुग्रीव से हुई, जिसे उसके बड़े भाई ने राज्य से निकाल दिया था।
 
While roaming the earth in search of You, those two brothers met the monkey king Sugreeva, who had been expelled from his kingdom by his elder brother.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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