श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 35: सीताजी के पूछने पर हनुमान जी का श्रीराम के शारीरिक चिह्नों और गुणों का वर्णन करना तथा नर-वानर की मित्रता का प्रसङ्ग सुनाकर सीताजी के मन में विश्वास उत्पन्न करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.35.2 
क्व ते रामेण संसर्ग: कथं जानासि लक्ष्मणम्।
वानराणां नराणां च कथमासीत् समागम:॥ २॥
 
 
अनुवाद
हे वानर! श्री रामचन्द्रजी से तुम्हारा क्या सम्बन्ध था? तुम लक्ष्मण को कैसे जानते हो? मनुष्य और वानरों का यह मिलन कैसे संभव हुआ?॥ 2॥
 
O monkey! What was your relation with Shri Ramchandraji? How do you know Lakshmana? How was this union of humans and monkeys possible?॥ 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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