श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 35: सीताजी के पूछने पर हनुमान जी का श्रीराम के शारीरिक चिह्नों और गुणों का वर्णन करना तथा नर-वानर की मित्रता का प्रसङ्ग सुनाकर सीताजी के मन में विश्वास उत्पन्न करना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  5.35.16 
दुन्दुभिस्वननिर्घोष: स्निग्धवर्ण: प्रतापवान्।
समश्च सुविभक्ताङ्गो वर्णं श्यामं समाश्रित:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
'उसका स्वर मृदंग के समान गम्भीर है, उसका रंग सुन्दर और कोमल है। उसकी शोभा बहुत महान है। उसके सब अंग सुडौल और सम हैं। उसका रंग श्याम है।॥16॥
 
‘His voice is as deep as a drum and his complexion is beautiful and smooth. His glory is very great. All his limbs are well shaped and equal. His complexion is dark.॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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