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ramayan 5.35.14: 'उन्होंने यजुर्वेद की भी अच्छी शिक्षा प्राप्त की है। वेदों के ज्ञाता विद्वानों ने उनका बहुत आदर किया है। वे चारों वेदों, धनुर्वेद तथा छहों वेदांगों के भी अच्छे ज्ञाता हैं।॥14॥   |   ramayan सर्ग 5.35: सीताजी के पूछने पर हनुमान जी का श्रीराम के शारीरिक चिह्नों और गुणों का वर्णन करना तथा नर-वानर की मित्रता का प्रसङ्ग सुनाकर सीताजी के मन में विश्वास उत्पन्न करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 35: सीताजी के पूछने पर हनुमान जी का श्रीराम के शारीरिक चिह्नों और गुणों का वर्णन करना तथा नर-वानर की मित्रता का प्रसङ्ग सुनाकर सीताजी के मन में विश्वास उत्पन्न करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  5.35.14 
यजुर्वेदविनीतश्च वेदविद्भि: सुपूजित:।
धनुर्वेदे च वेदे च वेदाङ्गेषु च निष्ठित:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
'उन्होंने यजुर्वेद की भी अच्छी शिक्षा प्राप्त की है। वेदों के ज्ञाता विद्वानों ने उनका बहुत आदर किया है। वे चारों वेदों, धनुर्वेद तथा छहों वेदांगों के भी अच्छे ज्ञाता हैं।॥14॥
 
‘He has also received good education in Yajur Veda. The scholars who know Vedas have respected him a lot. He is also a well-versed scholar of the four Vedas, Dhanur Veda and the six Vedangas.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)