श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 35: सीताजी के पूछने पर हनुमान जी का श्रीराम के शारीरिक चिह्नों और गुणों का वर्णन करना तथा नर-वानर की मित्रता का प्रसङ्ग सुनाकर सीताजी के मन में विश्वास उत्पन्न करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.35.13 
राजनीत्यां विनीतश्च ब्राह्मणानामुपासक:।
ज्ञानवान् शीलसम्पन्नो विनीतश्च परंतप:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
वह राजनीति में पूर्णतः शिक्षित, ब्राह्मणों का उपासक, ज्ञानी, विनयशील, विनीत तथा शत्रुओं को पीड़ा देने में समर्थ है। 13॥
 
‘He is fully educated in politics, a worshiper of Brahmins, knowledgeable, polite, humble and capable of tormenting his enemies. 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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